पित्ती (अर्टिकेरिया) होने के कारण: पित्ती क्यों होती है और कैसे ठीक करें
परिचय
जाने पित्ती होने के कारण (Pitti Hone Ke Karan)
नमस्कार,
मैं डॉ कर्म पटेल, त्वचा रोग विशेषज्ञ हूँ। आज मैं आपको सरल शब्दों में समझाऊँगी कि पित्ती होने के कारण क्या होते हैं, urticaria kyu hota hai, पित्ती (हीव्स) क्यों होती है और पित्ती के लिए स्थायी इलाज कैसे किया जाता है।
पित्ती त्वचा से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में से एक है, जिसे हम रोज़ाना त्वचा रोग चिकित्सा में देखते हैं।
कई मरीज घबराकर आते हैं क्योंकि यह दाने:
- अचानक निकल आते हैं
- बहुत तेज़ खुजली करते हैं
- शरीर में जगह बदलते रहते हैं
कुछ लोगों को लगता है कि यह कोई संक्रमण है, जबकि कुछ को डर रहता है कि कहीं यह कोई गंभीर बीमारी तो नहीं।
आइए, एक-एक करके सभी भ्रम दूर करते हैं।
पित्ती (अर्टिकेरिया / हीव्स) क्या होती है?
पित्ती, जिसे मेडिकल भाषा में अर्टिकेरिया (Hives) कहा जाता है, त्वचा की ऊपरी परत में होने वाली अस्थायी सूजन होती है।
यह आमतौर पर इस प्रकार दिखाई देती है:
- लाल या त्वचा के रंग जैसे उभरे हुए दाने
- तेज़ खुजली या जलन
- दानों का आकार या आकृति बदलना
- कुछ समय बाद बिना निशान छोड़े गायब हो जाना
एक दाना कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों तक रह सकता है, लेकिन नए दाने बार-बार निकलते रह सकते हैं।
पित्ती कोई संक्रमण नहीं है और यह छूने से नहीं फैलती।
त्वचा रोग विशेषज्ञ के साथ आज भी पित्ती के लिए स्थायी इलाज संभव है.
पित्ती क्यों होती है? (चिकित्सकीय कारण)
बहुत से लोग जानना चाहते हैं - urticaria kya hota hai और यह क्यों होती है।
पित्ती तब होती है जब त्वचा में मौजूद मास्ट सेल्स सक्रिय हो जाते हैं।
ये कोशिकाएँ कुछ रसायन छोड़ती हैं, जैसे:
- हिस्टामिन
- ल्यूकोट्राइन्स
- प्रोस्टाग्लैंडिन्स
हिस्टामिन के कारण:
- रक्त नलिकाओं से तरल बाहर निकलता है
- त्वचा में सूजन आती है
- लालपन और खुजली होती है
यही प्रक्रिया पित्ती के सभी लक्षणों के लिए जिम्मेदार होती है।
- सामान्य एलर्जी ट्रिगर:
- मूंगफली, अंडा, सीफूड
- दूध या खाद्य पदार्थों के रसायन
- एंटीबायोटिक दवाएँ
- दर्द निवारक दवाएँ
- कीड़े का काटना
- लेटेक्स से संपर्क
- दाने अचानक निकलते हैं
- एलर्जी हटने पर ठीक हो जाते हैं
- एंटीहिस्टामिन दवाओं से जल्दी आराम मिलता है
- तनाव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करता है
- हिस्टामिन का स्राव बढ़ जाता है
- पित्ती लंबे समय तक बनी रह सकती है
- मानसिक तनाव में
- पढ़ाई या काम के दबाव में
- नींद पूरी न होने पर
- चिंता की स्थिति में
- वायरल बुखार
- फ्लू या कोरोना संक्रमण
- गले का संक्रमण
- दाँतों का इंफेक्शन
- पेट का जीवाणु संक्रमण
- पेशाब का संक्रमण
- अधिक गर्मी या पसीना
- ठंड लगना
- टाइट कपड़े या बेल्ट
- धूप में निकलना
- व्यायाम या त्वचा में रगड़
- पसीने से होने वाली पित्ती
- ठंड से होने वाली पित्ती
- दबाव से होने वाली पित्ती
- धूप से होने वाली पित्ती
5. ऑटोइम्यून पित्ती
यदि पित्ती 6 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे, तो इसका कारण अक्सर ऑटोइम्यून होता है।
इस स्थिति में:
- शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वयं की त्वचा कोशिकाओं पर हमला करती है
- लगातार हिस्टामिन निकलता रहता है
- एलर्जी जाँच सामान्य आती है
इसी कारण कई मरीज कहते हैं: “मेरी एलर्जी रिपोर्ट सामान्य है, फिर भी पित्ती बार-बार हो रही है।”
यदि आप यह सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं कि आपकी त्वचा पर हुआ रैश पित्ती (अर्टिकेरिया ), एलर्जी, संक्रमण या किसी अन्य त्वचा रोग के कारण है, तो हमारी निःशुल्क ऑनलाइन त्वचा विशेषज्ञ परामर्श सेवा से तुरंत विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करें।
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- अवधि 6 सप्ताह से कम
- बच्चों और युवाओं में अधिक
- भोजन, दवा या संक्रमण से
- 6 सप्ताह से अधिक समय तक
- रोज़ या बार-बार निकलती है
- अधिकतर ऑटोइम्यून या तनाव से
- केवल किसी विशेष कारण से
- जैसे ठंडा पानी या खुजलाने पर
- त्वचा पर अचानक उभरे हुए लाल या सफेद दाने
- बहुत तेज़ खुजली या जलन
- दानों का आकार और जगह बार-बार बदलना
- कुछ घंटों में दानों का गायब हो जाना
- खुजलाने पर दानों का और फैल जाना
- गर्मी या पसीने से लक्षण बढ़ जाना
- रात में खुजली के कारण नींद न आना
- होंठ, पलकों या चेहरे में सूजन
- आंखों के आसपास फुलाव
- गले में भारीपन
- सांस लेने में परेशानी
- होंठ या पलकों में सूजन
- जीभ या गले में सूजन
- सांस लेने में तकलीफ
- अचानक चक्कर या कमजोरी
- सेटिरीज़ीन (Cetirizine)
- लेवोसेटिरीज़ीन (Levocetirizine)
- फेक्सोफेनाडीन (Fexofenadine)
- डेस्लोराटाडीन (Desloratadine)
- कुछ खाद्य पदार्थ (सीफूड, मेवे, अंडे, फूड एडिटिव्स)
- दर्द निवारक दवाएं (खासकर NSAIDs)
- संक्रमण
- गर्मी, ठंड, दबाव या अधिक पसीना
- तनाव और नींद की कमी
- ओरल कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का छोटा कोर्स (सिर्फ सीमित अवधि के लिए)
- खुजली कम करने वाले लोशन या कैलामाइन आधारित प्रोडक्ट्स
- अधिक डोज में एंटीहिस्टामिन थेरेपी
- इम्यूनोमॉड्युलेटर दवाएं
- इंजेक्शन द्वारा दी जाने वाली बायोलॉजिक थेरेपी (क्रॉनिक स्पॉन्टेनियस अर्टिकेरिया के लिए)
- पर्याप्त नींद लेना
- तनाव प्रबंधन तकनीक अपनाना
- टाइट कपड़ों से बचना
- सौम्य और खुशबू-रहित स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल
- अत्यधिक गर्मी और गर्म पानी से नहाने से बचना
महत्वपूर्ण जानकारी: अर्टिकेरिया का इलाज हर मरीज के लिए अलग-अलग होता है। खुद से दवाएं लेना या बार-बार स्टेरॉइड का इस्तेमाल करने से लक्षण बिगड़ सकते हैं और साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। सही डायग्नोसिस और सुरक्षित इलाज के लिए त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी है। लगातार या बार-बार होने वाली पित्ती के लिए त्वचा विशेषज्ञ की निगरानी में किया गया इलाज सबसे सुरक्षित और तेज़ राहत देने वाला तरीका है।
- पित्ती (अर्टिकेरिया / हीव्स)
- एलर्जिक रैश
- लंबे समय से चल रही खुजली
- बार-बार होने वाले त्वचा के फ्लेयर-अप
- 80% से अधिक क्रॉनिक पित्ती के मामले ऑटोइम्यून कारणों से होते हैं
- तनाव पित्ती को बढ़ाने वाला एक सिद्ध कारक है
- सामान्य एलर्जी जाँच अक्सर सामान्य आती है
- लंबे समय तक एंटीहिस्टामिन दवाएँ सही निगरानी में सुरक्षित होती हैं
- लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए
- ट्रिगर कारणों की पहचान करना
- हिस्टामिन के प्रभाव को नियंत्रित करना
- मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार करना
- कारण
- बीमारी की अवधि
- लक्षणों की गंभीरता
- एंटीहिस्टामिन दवाएँ
- ट्रिगर से बचाव
- तनाव नियंत्रण
- क्रॉनिक मामलों में उन्नत दवाएँ
- पित्ती 6 सप्ताह से अधिक समय तक बनी रहे
- लक्षण बार-बार वापस आएँ
- रात में खुजली के कारण नींद खराब हो
- सामान्य दवाओं से आराम न मिले
- आप पित्ती का वास्तविक कारण जानना चाहते हों
- बाल झड़ने का उपचार
- सामान्य त्वचा परामर्श
- जॉक खुजली का इलाज
- विटिलिगो (सफेद दाग) उपचार
- सोरायसिस उपचार
- स्केबीज़ (खुजली रोग) उपचार
- दाद (फंगल इंफेक्शन) उपचार
MD (Dermatology) | पंजीकरण संख्या: G-53014
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